पार्वती चालीसा | Parvati Chalisa
॥ दोहा ॥जय गिरी तनये दक्षजेशम्भू प्रिये गुणखानि ।गणपति जननी पार्वतीअम्बे! शक्ति! भवानि ॥॥ चौपाई ॥ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे ।पंच बदन नित तुमको ध्यावे ॥ षड्मुख कहि न सकत यश तेरो ।सहसबदन श्रम करत घनेरो ॥ तेऊ पार न पावत माता ।स्थित रक्षा लय हिय सजाता ॥ अधर प्रवाल सदृश अरुणारे ।अति कमनीय नयन … Read more